सोनभद्र में हाथियों का आतंक

खालसा न्यूज़
सोनभद्र। म्योरपुर वन रेंज के गेदूरी पहाड़ी पर मंलवार, गुरुवार, शुक्रवार तीन दिनों तक दिन रात बिताने के बाद आधी रात को जब हाथियो ने बिच्छी गांव आने की कोशिश की तो वन विभाग और बंगाल की विशेषज्ञ टीम को देख फिर वो पहाड़ी पर चली गईं. बुधवार को हाथी नही दिखे जिससे वन महकमे में खलबली मच गयी है वन विभाग समझ नही आ रहा था कि आखिर हाथी किधर चले गए।
वन क्षेत्राधिकारी शाहजादा इमायुलुद्दीन ने बताया कि मेरे नेतृत्व में वन कर्मियों और बंगाल की टीम डैम किनारे पांच जगहों पर आग जलाकर हाथियो के टापू से उतर कर आने का इंतजार कर रही थी ।लगभग एक बजे हाथियो ने पहाड़ी से उतर कर जलाषय मार्ग से किनारे आने लगे ।जब हाथियो को भनक लगी तो वे चिहाड कर टीम को डराने की कोशिश किये।जब हम लोग वहां से नही हटे और आग जलाते रहे तो हाथी वापस चले गए।बुधवार को स्थानीय ग्रामीणों की मदद से तीन नावों द्वारा दस लोगो को जलाषय बीच की पहाड़ी की निगरानी करायी गयी।कुछ लोग नाव से उतर कर सौ एकड़ क्षेत्रफल वाले गेदुरा पहाड़ी पर चढ़ कर भी हाथियो को खोजने का प्रयास किया। तो वाचर तेजु यादव ने हाथियो को खुद देखा और रेंज कार्यालय को तीन बजे दिन में सूचना दी। रेंजर शाहजादा का कहना है कि वाचरो और वन कर्मियों को कांचन हरहोरी करकोरी,खन्ता ,गडिया ,नगराज खजूरी आदि जंगल के किनारे ड्यूटी लगाई गई है।जिससे हाथी जंगल या रिहंद जलाषय के टापू से बाहर गाँव की तरफ निकले तो जानकारी मिल सके। बताया कि वाचर ने जहां हाथियो को देखा है वहा नाव से जाकर और पहाड़ी पर चढना खतरे से खाली नही है। हमारी टीम अब इंतजार करेगी।
बता दें कि, रिहंद जलाषय बीच गेदूरी पहाड़ी पर डेरा जमाए जंगली हाथी नाव से भी तेज तैरते है। स्तानीय मछुआरों ने बताया कि जिस गति से हम लोग नाव चला कर मछली पकड़ते है।हाथियो की तैरने की गति उससे तेज है।ऐसे में नाव पर चढ़ कर हाथियो की निगरानी कराना भी खतरे से खाली नही है। फिर भी बुधवार को तीन नाव टापू के पास पहुच कर हाथियों को तलाश ही लिए। वाचर तेजू और सहयोगी दसरथ,बुल्लू गोंड़ तीन घण्टे पहाड़ी पर रहे।और सेल फोन पर बताया कि हम लोग पत्थर के उच्चे चटानो पर बैठे है।जब हाथी दूर चले जायेंगे तो चुपके से उतर कर नाव द्वारा वापस हो जाएंगे। खबर लिखे जाने तक तीनो लोग टापू पर ही थे।
रिपोर्ट-रंगेश सिंह

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