वर्तमान वैश्विक परिवेश में प्रासंगिक है सृजनात्मक लेखन

वर्तमान वैश्विक परिवेश में प्रासंगिक है सृजनात्मक लेखन

खालसा न्यूज़डेस्क/लखनऊ

दिनांक 20 जनवरी 2021 को लखनऊ विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर रवीन्द्र प्रताप सिंह ने उज़्बेकिस्तान के एरकिन वोहिदोव संस्थान के लेखक से मिलिये कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय अंग्रेजी कवि और नाटककार के रूप में प्रतिभाग किया। उन्होंने ‘सृजनात्मक लेखन’ पर ऑनलाइन व्याख्यान दिया और छात्रों शिक्षकों एवं अन्य श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर दिए ।

प्रोफेसर सिंह दर्शकों एवं श्रोताओं को भारतीय संस्कृति से परिचित करते हुए ,इसके वैसुधैव कुटुंबकम और आमेलन पक्ष पर भी चर्चा किया। उन्होंने भारत और उज्बेकिस्तान के सांस्कृतिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला और वर्तमान वैश्विक परिवेश में सृजनात्मक लेखन की प्रासंगिकता और आवश्यकता बताई ।

अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि ” सृजनात्मक लेखन व्यक्ति में सामाजिक और भावनात्मक सम्बन्ध और सोच को बलवती करता है , उसे विभिन्न कठिन परिस्थितियों में चलने और आगे बढ़ने की शक्ति देता है। साहित्य का समाज के लिए बहुत बड़ा योगदान है। भावों को समय और परिस्थिति के अनुसार संजो लेना सृजनात्मकता का मूल है। सर्जक और साहित्यकार सरल भाव से साधारण में असाधारण देखता है और सामान्य व्यक्ति के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है

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