गुजरात दंगा मामले में मोदी और उनके मंत्रियों को क्लीन चिट

गोधरा में 59 लोगों की आग में जलकर हुई थी मौत

नई दिल्ली : गुजरात हाई कोर्ट ने 2002 में हुए दंगे में मोदी और उनके मंत्रियों को क्लीनचिट दे दी है। पंद्रह साल पहले 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में 59 लोगों की आग में जलकर मौत हो गई | ये सभी ‘कारसेवक’ थे, जो अयोध्या से लौट रहे थे |इस घटना के विरोध में पुरे गुजरात में दंगा शुरू हो गया और कई लोग मारे गए थे. उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे.
गोधरा कांड के 17 साल बाद गुजरात सरकार द्वारा गठित जांच आयोग रिपोर्ट जारी की गई |गोधराकांड की रिपोर्ट गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने पेश की | बता दें कि राज्य सरकार ने साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के एस-6 कोच में आग लगने की घटना की जांच के लिए जस्टिस मनस्वती और जस्टिस मेहता जांच आयोग का गठन किया था | बुधवार को राज्य सरकार के मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने इस जांच रिपोर्ट के भाग दो को पेश किया | इसकी जानकारी उन्होंने एक प्रेसवार्ता में दी |
राज्य के गृह मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा ने सदन में रिपोर्ट पेश की | इस रिपोर्ट को तत्कालीन सरकार को सौंपे जाने के पांच साल बाद सदन में पेश किया गया है |

सेवानिवृत्त न्यायाधीश जीटी नानावती और अक्षय मेहता ने 2002 दंगों पर अपनी अंतिम रिपोर्ट 2014 में राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सौंपी थी | इन दंगों में 1000 से अधिक लोग मारे गए थे जिनमें से अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के थे |
रिपोर्ट में कहा गया है कि नरेंद्र मोदी और किसी भी नेता की गोधराकांड में कोई भूमिका नहीं है | कहा गया कि सरकार ने उस दिन किसी बंद का ऐलान नहीं किया था | नानावती आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि गोधराकांड में कोई अधिकारी या पुलिस की भागीदारी नहीं थी |

बता दें कि, 27 फरवरी की सुबह जैसे ही साबरमती एक्सप्रेस गोधरा रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, उसके एक कोच से आग की लपटें उठने लगीं और धुएं का गुबार निकलने लगा | साबरमती ट्रेन के S-6 कोच के अंदर भीषण आग लगी थी | जिससे कोच में मौजूद यात्री उसकी चपेट में आ गए. |इनमें से ज्यादातर वो कारसेवक थे, जो राम मंदिर आंदोलन के तहत अयोध्या में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे | आग से झुलसकर 59 कारसेवकों की मौत हो गई |

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