इसे गौशाला नहीं गायों की कब्रगाह कहिये !

गौ माता ठंड व भूख से तड़प-तड़प कर मर रही हैं

 

बाँदा। सरकार बनते ही सूबे के मुखिया और गोरक्ष पीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि , गौहत्या पूरी तरह से प्रतिबंधित होगी। मुख्यमंत्री के आदेश का असर हुआ गौहत्या रोकने में सरकार सफल हुई. सरकार उत्तर प्रदेश में गौ हत्या को रोकने व गौ संरक्षण के लिए अस्थाई गौशालाओं के निर्माण के लिए अनुदान दिया। लेकिन प्रशाशनिक उदासीनता के चलते ये गौशालएं गायें के लिए कब्रगाह बनती नजर आ रही है। बाँदा जनपद की गौशालाओं में इन दिनों गौ माता ठंड व भूख से तड़प-तड़प कर मर रही हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जबकि प्रदेश सरकार द्वारा गौशालाओं के लिए करोड़ों का बजट भी दिया गया है।
इन सबके बावजूद गौशालाओं में किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है।आपको बता दें कि पूरा मामला बबेरू तहसील के पल्हरी गांव में बनी गौशाला का है। हालांकि, जब इस बारे में समाजसेवी अरुण कुमार पटेल (कोर्रा खुर्द ) ने जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से बात की तो जांच की बात कहकर टाल दिया हैं , उन्होंने बताया है कि अगर दोषी लोगो के खिलाफ जल्द कार्यवाही नही की जाती तो हम सब लोग जल्द ही रोड व चक्का जाम करेगे ,जिसके जिम्मेदार स्थानीय अधिकारी व जनप्रतिनिधि होंगे । इस कड़कड़ाती ठंड में गौशालायें गोवंशों की कब्रगाह बनती जा रही हैं। रोजाना जिले की गौशालाओं में कई गायों की मौत हो रही है, लेकिन इन सब के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा को कोई सुध नहीं लिया जा रहा है, स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि गौशालाओं में यह बेजुबान बारी बारी से अपनी मौत का इंतजार कर रहे हैं। गायों की दुर्दशा का आंखों देखा एक ऐसी गौशाला है जिसमें गोवंशों के शवों को आवारा कुत्ते क्षतिग्रस्त करते दिख रहे हैं। इस प्रकार की घटनाओ के बावजूद भी स्थानीय प्रशासन द्वारा जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्यवाही नही की जा रही हैं ।
बाँदा से अरुण पटेल की रिपोर्ट

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