आखिर कब तक बलात्कार होते रहेंगे !

हम मुर्दे ही अपनी बहन, बेटियों की लाशें ढ़ोते रहेगें, आखिर कब तक


 

हमारा भारत अपनी महानतम् ,गौरवशाली, संस्कृति, सभ्यता और मर्यादाओं के लिए सारी दुनिया में जाना जाता है और कितना दुःखद है कि यहां की बेटियों के साथ ऐसी घृणित घटनायें थमने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं और कानून ने हमारे हाथ बांध रखें हैं तो क्या ‘इसलिए हम मुर्दे ही अपनी बहन, बेटियों की लाशें ढ़ोते रहेगें, आखिर कब तक?’ जब हम हमारी बहन बेटी का रेप का केस हम जिंदगी भर लड़ सकते हैं तो क्या हम लोग इन वहसी दरिंदों को ढूंढ़ कर उसी बेहरहमी से मार कर खत्म नहीं कर सकते,इन दरिंदों के मारने का भी केस ही तो होगा तो हम लड़ेगें ।
पूरा सभ्य समाज पूरा सभ्य देश मिलकर लड़ेगा, अब चुप बैठने से काम नही चलने वाला , कभी ढ़ाई साल की कन्याओं के साथ रेप हो जाता कभी 60 साल की बृद्ध माताओं के साथ रेप हो जाता है, कभी सड़क पर भीख मांगती गरीब और शरीर से लाचार दिव्यांग महिलाओं के साथ रेप हो जाता है,आखिर कब तक हम लोग चुप रहेगें ??
और कब तक वादे पर वादे और तारीख पर तारीख मिलती रहेगी? कानून ऐसा हो कि किसी भी उम्र की माताओं बहनों के साथ दुष्कर्म हो और किसी भी उम्र के राक्षस जैसे जानवर ने किया हो, उसकी जबर्दस्त कुटाई का वीडियो वायरल किया जाये, फिर उसे बीच चौराहे पर सरेआम जिंदा जलाते हुए फांसी दी जाये ।
,पर हमारे साहब जी ऐसा नही कर सकते हैं ,और ना ही हम लोगों को ऐसा करने देगे,
हम लोग अपने देश के शीर्ष नेताओं से पूछना चाहते हैं कि क्या आपने हम लोगों को मूर्ख समझ रखा है । मैं समाजसेवी अरुण कुमार पटेल (कोर्राखुर्द) स्पष्ट शब्दों में साफ कहना चाहता हूं कि माननीय जब तक इन राक्षसों जैसे जानवरों को भयानक मौत का डर नहीं होगा,
तब तक इनके हौंसले पस्त नहीं होगें,
साहब हमारा आपसे विन्रम निवेदन है कि अब या तो अपना कानून कठोर कर लीजिए या फिर इन राक्षसों जैसे जानवरो को जनता द्वारा मौत को कानूनी मान्यता दे दीजिए ।

इस लेख में व्यक्त विचार समाजसेवी अरुण कुमार पटेल (कोर्राखुर्द) के निजी विचार है

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