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टीआरपी के खेल ने सारी पत्रकारिता को कोने में ढकेल दिया है। कण्ट्रोवर्सियल सामग्री को पाठक के सामने परोसना और फिर उससे भारी मात्रा में यूवी-पीवी हासिल करना और मोटी रकम बनाना ही मुख्य लक्ष्य है। लेकिन क्या इस तरह की पत्रकारिता से हम समाज को केवल और केवल बांटने का काम नहीं कर रहे हैं। देश निर्माण और राष्ट्र की एकता की बात करने वाला सोशल मीडिया खुद कटघरे में खड़ा हुआ दिखाई देता है।

वेब जर्निलज्म में हर विषय को लेकर धारणा बनाकर काम किया जा रहा है। वह अच्छा, वह बुरा। दो तरह की धारणाएं। इन दोनों के बीच फैक्ट कही दबकर रह जाता है। असली चीज सामने आ ही नहीं पाती। वेब जर्नलिज्म में ग्राउंड रिपोर्टिंग तो ख़त्म ही हो गयी है। बिना बातचीत, बिना तथ्य बस एक तरह की धारणा को ध्यान में रखकर काम किया जा रहा है जिससे लोगों के असली मुद्दे उजागर ही नहीं हो पाते।

इन सब समस्याओं के बीच एक ऐसे न्यूज पोर्टल की आवश्यकता है जो निष्पक्ष तरीके के साथ और ग्राउंड पर जाकर असली सूचनायें जनता के सामने प्रस्तुत कर सके। उनमें किसी भी प्रकार लाग लपेट और बनावटी पन नजर न आये। खालसा न्यूज डॉट इन की शुरुआत इन्हीं शर्तों और मानकों को ध्यान में रखकर की गयी है।

टीआरपी की दौड़ में खालसा न्यूज डॉट इन आपको हर खबर तथ्यों और जनता से बातचीत के आधार पर परोसेगा। हम कम संसाधानों और कुछ लोगों के साथ भले ही इस न्यूज वेबसाइट की शुरुआत कर रहे हों लेकिन हमारा उद्द्देश्य बड़ा है।

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